Class 04 | हिन्दी | वीणा | Ch. 01 चिड़िया का गीत OK
प्रस्तुत कविता में एक छोटी चिड़िया के माध्यम से जीवन में प्राप्त अनुभवों और उसकी सोच-समझ के दायरे के विकास को दिखाया गया है। शुरुआत में चिड़िया अंडे के अंदर थी तो उसे ही अपना संसार मानती थी पर जैसे-जैसे वह बड़ी हुई और जहाँ-जहाँ तक उसकी सीमा रही, वह उसी स्थान को अपना संसार मानती रही।
जब वह आसमान में अपने पंखों को फैलाकर उड़ने लगी, तभी वह समझ सकी कि यह संसार बहुत बड़ा है। इन अनुभवों को प्राप्त कर चिड़िया की सोच निरंतर विकसित हुई । चिड़िया की तरह ही अपने प्राप्त अनुभवों से एक बच्चे की सोच-समझ का दायरा भी बढ़ता है, साथ-साथ संसार देखने का. उसका नज़रिया भी परिवर्तित होता है। नए अनुभव इस संसार को समझने में उसकी मदद करते हैं। खुले आकाश की तरह जीवन भी बहुत बड़ा है, अतः हमें अपनी सीमाओं से बाहर निकलकर जीवन की अनंत संभावनाओं का आनंद लेना चाहिए।
चिड़िया का गीत सप्रसंग व्याख्या
अंडे जैसा था आकार
तब मैं यही समझती थी
बस इतना सा ही है संसार ।
फिर मेरा घर बना घोंसला
सूखे तिनकों से तैयार
तब मैं यही समझती थी
बस इतना सा ही है संसार ।
शब्दार्थ –
आकार – बनावट,
संसार- दुनिया,
घोंसला – पक्षी द्वारा अंडे देने या रहने के लिए बनाया गया घर,
तिनका – सूखी घास का छोटा टुकड़ा।
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा – 4’ में संकलित कविता ‘चिड़िया का गीत’ से ली गई हैं। इस कविता के कवि निरंकार देव ‘सेवक’ हैं। यह कविता एक नन्ही सी चिड़िया के अपने घर को लेकर परिवर्तित होते दृष्टिकोण को दर्शाती है । व्याख्या – नन्ही चिड़िया जिसका जन्म अंडे में हुआ है वह जब तक अंडे में रहती है, उसे अपना संसार समझती है। इसके बाद जब वह अंडे से बाहर निकलकर घोंसले में रहती है तो उसे वह घोंसला ही अपना संसार लगता है क्योंकि वह अभी तक घोंसले से बाहर नहीं गई है। उसे लगता है कि यह संसार केवल घोंसले तक ही सीमित है।
2. फिर मैं निकल गई शाखों पर
हरी-भरी थीं जो सुकुमार
तब मैं यही समझती थी
बस इतना सा ही है संसार ।
आखिर जब मैं आसमान में
उड़ी दूर तक पंख पसार
तभी समझ में मेरी आया
बहुत बड़ा है यह संसार ।
शब्दार्थ –
शाखा – डाली,
सुकुमार – नाजुक, कोमल,
आखिर – बाद में, अंत में,
पंख पसार- पंख फैलाए,
हरदम – हमेशा।
प्रसंग –
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा – 4’ में संकलित कविता ‘चिड़िया का गीत’ से ली गई हैं। इस कविता के कवि निरंकार देव ‘सेवक’ हैं। यह कविता एक नन्ही सी चिड़िया के अपने घर को लेकर परिवर्तित होते दृष्टिकोण को दर्शाती है।
व्याख्या –
नन्ही चिड़िया जब अपने घोंसले से निकलकर पेड़ की हरी-भरी शाखाओं पर आना शुरू करती है तो वह उन शाखाओं को अपना संसार समझती है। फिर जब वह उड़ना सीख जाती है और खुले आसमान में दूर तक उड़ती है, तब अंत में उसे समझ में आता है कि यह संसार बहुत बड़ा है, अनंत और विशाल है। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि यह बताते हैं कि जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारी सोच व समझ विकसित होती जाती है।
सबसे पहले मेरे घर का
अंडे जैसा था आकार
तब मैं यही समझती थी
बस इतना सा ही है संसार |
फिर मेरा घर बना घोंसला
सूखे तिनकों से तैयार
तब मैं यही समझती थी
बस इतना सा ही है संसार ।
आखिर जब मैं आसमान में
उड़ी दूर तक पंख पसार
तभी समझ में मेरी आया
बहुत बड़ा है यह संसार ।
– निरंकार देव ‘सेवक’
कविता की बात
उत्तर :
प्रश्न 2. नीचे दी गई कविता की पंक्तियों का मिलान उनके नीचे दी गई उपयुक्त पंक्तियों से कीजिए-
प्रश्न 1. चिड़िया को यह संसार कब-कब छोटा लगा?
उत्तर: जब चिड़िया अंडे के अंदर थी और बाद में घोंसले व पेड़ की शाखाओं पर रहती थी, तब उसे संसार छोटा लगता था।
प्रश्न 2. खुले आकाश में उड़ते समय चिड़िया ने क्या-क्या देखा होगा?
उत्तर: खुले आकाश में उड़ते समय चिड़िया ने जंगल, घर, नदी, बगीचे, पहाड़ और अन्य पक्षी देखे होंगे। इन्हें देखकर उसे लगा कि संसार बहुत बड़ा है।
प्रश्न 3. सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट क्यों सुनाई देती है?
उत्तर: सुबह पक्षी भोजन की तलाश में बाहर जाते हैं और शाम को वापस अपने घोंसलों में लौटते हैं। इसलिए उस समय उनकी चहचहाहट सुनाई देती है।
समझ और अनुभव
प्रश्न 1. जब शिशु चिड़िया घोंसले से बाहर आती है तो उसे संसार बड़ा लगता है। क्या आपको भी ऐसा लगता है? क्यों?
उत्तर: हाँ, मुझे भी ऐसा लगता है। जब मैं घर से बाहर जाता हूँ तो मुझे नई-नई चीज़ें दिखाई देती हैं, इसलिए संसार बहुत बड़ा लगता है।
प्रश्न 2. आप भी धीरे-धीरे बड़े हो रहे हैं। अपने अंदर आए परिवर्तन लिखिए—
* शारीरिक परिवर्तन * रुचियों में परिवर्तन * खान-पान में परिवर्तन * चित्रकारी * गीत-संगीत * पढ़ना-लिखना * समझ में परिवर्तन * खेल * नृत्य और अभिनय
उत्तर:
शारीरिक परिवर्तन – मेरा कद और ताकत बढ़ रही है।
खान-पान में परिवर्तन – अब मैं अलग-अलग प्रकार का खाना खाने लगा/लगी हूँ।
रुचियों में परिवर्तन – अब मुझे साइकिल चलाना और खेलना पसंद है।
चित्रकारी – अब मैं अच्छे चित्र बना लेता/लेती हूँ।
गीत-संगीत – अब मैं गीत याद करके गा लेता/लेती हूँ।
पढ़ना-लिखना – अब मैं पहले से अच्छा पढ़ और लिख सकता/सकती हूँ।
समझ में परिवर्तन – अब मैं पहले से ज्यादा समझदार हो गया/गई हूँ।
खेल – अब मुझे क्रिकेट और फुटबॉल खेलना अच्छा लगता है।
नृत्य और अभिनय – अब मैं थोड़ा-बहुत नृत्य और अभिनय कर लेता/लेती हूँ।
प्रश्न 3. जब आपने इनमें से किसी चीज़ को पहली बार देखा तो कैसा लगा?
* रेलगाड़ी * मॉल * पहाड़ * मेट्रो ट्रेन * समुद्र * वायुयान * चार या छह वीथियों वाली सड़कें * खेत * जलयान * जंगल * रेगिस्तान या मरुस्थल * नदी
इनके अतिरिक्त, आपके कुछ और अनुभव हो सकते हैं, उन्हें भी कक्षा में अवश्य साझा कीजिए ।
उत्तर:
जब मैंने पहली बार रेलगाड़ी/मॉल/पहाड़/मेट्रो आदि देखे, तो मुझे बहुत आश्चर्य और खुशी हुई। मुझे लगा कि संसार बहुत बड़ा और सुंदर है। समझ और अनुभव।
चित्रों की भाषा
नीचे दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए । चित्र से मेल खाती कविता की कुछ पंक्तियाँ उदाहरण के रूप में दी गई हैं। अब कविता की उपयुक्त पंक्तियों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए ।
उत्तर:
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1. कविता की पंक्ति है- “आखिर जब मैं आसमान में, उड़ी दूर तक पंख पसार” — चिड़िया ने इतनी दूर तक उड़ान क्यों भरी होगी?
उत्तर: चिड़िया पहले छोटे स्थान में रहती थी, इसलिए उसे संसार छोटा लगता था। जब उसने उड़ना सीखा, तो उसे लगा कि बाहर बहुत कुछ देखने को है। इसलिए उसने दूर तक उड़कर संसार को देखने और समझने की कोशिश की, साथ ही भोजन की तलाश भी की।
प्रश्न 2. पक्षी अपना घोंसला कैसे ढूँढ़ते होंगे?
उत्तर: जैसे हम अपने घर को पहचानते हैं, वैसे ही पक्षी भी अपने घोंसले के आसपास के पेड़, रास्ते और जगहों को पहचान लेते हैं। वे इन बातों को याद रखते हैं, इसलिए दूर जाने के बाद भी अपने घोंसले तक पहुँच जाते हैं।
प्रश्न 3. हमारे पूर्वजों को कैसे पता चला कि संसार बहुत बड़ा है?
उत्तर: हमारे पूर्वज अलग-अलग जगहों की यात्रा करते थे। वे नए-नए स्थान, नदियाँ और पहाड़ देखते थे। इन अनुभवों से उन्हें समझ आया कि संसार बहुत बड़ा है।
प्रश्न 4. क्या पक्षियों के माता-पिता भी उन्हें कुछ निर्देश देते होंगे?
उत्तर: हाँ, वे उन्हें सिखाते होंगे कि सुरक्षित रहो, बहुत दूर मत जाओ, अपने घोंसले को पहचानकर रखना और समय पर वापस लौट आना।
कल्पना की उड़ान
हर कोई पक्षी बनकर आकाश में उड़ना चाहता है। कल्पना कीजिए कि आप सभी खुले आकाश में पंख फैलाकर उड़ रहे हैं। कोई पहाड़ों के ऊपर उड़ रहा है, कोई समुद्र के ऊपर, कोई क्रिकेट मैच देखते हुए उड़ रहा है तो कोई विवाह के भोज का आनंद लेते हुए उड़ रहा है। आपको कल्पना करके कक्षा को बताना है कि आप ऊपर से नीचे क्या-क्या देख रहे हैं। आप अपनी प्रस्तुति को उसी तरह सुना सकते हैं जैसे खेलों में आँखों देखा हाल सुनाया जाता है, यथा- मैं पहाड़ों के ऊपर से उड़ रहा/रही हूँ। मुझे चारों ओर ऊँचे पेड़, झरने और सरोवर दिखाई दे रहे हैं। ठंडी हवा अच्छी लग रही है। अरे वाह ! अब तो बर्फ़ भी दिखने लगी है। यह एक सफेद चादर की तरह लग रही है। मैं इसका भरपूर आनंद ले रहा/ रही हूँ आदि।
उड़ान की परिस्थितियाँ, जैसे- पहाड़, समुद्र और उसका किनारा, जंगल, रेगिस्तान, मैदान, गाँव, नगर, बरात, विभिन्न खेल प्रतियोगिताएँ, विद्यालय, मेला, बाज़ार, चिकित्सालय, चिड़ियाघर, स्थानीय त्योहार आदि हो सकती हैं। शिक्षक बच्चों को उनके पिछले अनुभव और स्थानीयता को ध्यान में रखते हुए अन्य परिस्थितियाँ भी दे सकते हैं।
उत्तर
मैं खुले आकाश में पंख फैलाकर उड़ रहा/रही हूँ। नीचे मुझे हरे-भरे पेड़ और बड़े-बड़े पहाड़ दिखाई दे रहे हैं। पहाड़ों के बीच सुंदर झरने बह रहे हैं। ठंडी-ठंडी हवा मुझे बहुत अच्छी लग रही है।
अब मैं आगे बढ़ता/बढ़ती हूँ तो नीचे एक नदी दिख रही है, जो चमकती हुई बह रही है। उसके पास छोटे-छोटे घर और खेत दिखाई दे रहे हैं। लोग अपने काम में लगे हुए हैं।
थोड़ा आगे जाने पर मुझे एक शहर दिखता है। वहाँ ऊँची-ऊँची इमारतें, सड़कें और गाड़ियाँ दिखाई दे रही हैं। बाजार में बहुत भीड़ है और लोग खरीदारी कर रहे हैं।
अरे वाह! अब मुझे एक मेला भी दिख रहा है। वहाँ झूले लगे हैं, बच्चे खेल रहे हैं और चारों तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ हैं।
ऊपर से यह पूरा संसार बहुत सुंदर और बड़ा लग रहा है। मैं इस उड़ान का पूरा आनंद ले रहा/रही हूँ।
आकार-प्रकार
कविता में ‘अंडे जैसा था आकार’ का उल्लेख है। नीचे कुछ और चित्र दिए गए हैं जो अलग-अलग आकृतियों के हैं। चित्रों के नीचे उनके नाम लिखिए। इस कार्य में आप अपने शिक्षक की सहायता भी ले सकते हैं।

भाषा की बात
प्रश्न 1. “ फिर मैं निकल गई शाखों पर, हरी-भरी थीं जो सुकुमार”, कविता की इस पंक्ति में ‘सुकुमार’ शब्द आया है। यह ‘सु’ और ‘कुमार’ के मेल से बना है जिसका अर्थ है – कोमल या कोमल अंगों वाला। आप भी इसी प्रकार कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ खोजिए ।
प्रश्न 2. नीचे दिए गए वाक्यों में कुछ रिक्त स्थान हैं और कुछ शब्द रेखांकित किए गए हैं। उन शब्दों से वाक्यों को पूरा कीजिए जो रेखांकित शब्दों के विपरीत अर्थ रखते हैं-
(क) सूखा और ………………. कचरा अलग-अलग डिब्बों मे डालें।
(ख) दिल्ली मेरे घर से ………………. है लेकिन गुवाहाटी पास मे है।
(ग) अनवर कब ………………. और कब गया, पता ही नही चला।
(घ) कोई भी काम न तो बड़ा होता है और न ही ……………….।
उत्तर :
(क) गीला (ख) दूर’ (ग) आया (घ) छोट।
प्रश्न 3. आइए, अब एक रोचक संवाद पढ़ते हैं-
(विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ-10 पर दिए गए संवाद को पढ़ें।)
इतना-सा, उतना-सा, जितना – सा और कितना-सा का वाक्यों में प्रयोग कीजिए और उनके अर्थ भी समझाइए | फिर आपको राजू जितने रुपये मिल जाएँगे।
अब नीचे दिए गए शब्दों से वाक्य बनाकर सलमा की सहायता कीजिए-
इतना – सा – ________________________
उतना – सा – ________________________
जितना – सा – ________________________
कितना-सा – ________________________
उत्तर :
प्रयोग और अर्थ
इतना-सा – बहुत थोड़ा / कम
👉 वाक्य: मेरे पास इतना-सा समय है।
उतना-सा – उतनी ही मात्रा / बराबर
👉 वाक्य: मुझे उतना-सा पानी दे दो।
जितना-सा – जितनी मात्रा हो
👉 वाक्य: जितना-सा काम है, मैं कर लूँगा।
कितना-सा – कितनी मात्रा (प्रश्न)
👉 वाक्य: तुम्हारे पास कितना-सा पैसा है?
पाठ से आगे
पक्षी भोजन की खोज में घोंसले से बाहर उड़ते हैं। यह जानना रोचक होगा कि कौन-सा पक्षी क्या खाता है। नीचे कुछ पक्षियों के नाम दिए गए हैं। पता कीजिए कि वे क्या खाते हैं-
उत्तर :चित्र बनाना, गाना और नृत्य करना सभी को पसंद होता है। घोंसले से झाँकता हुआ शिशु पक्षी, हरे-भरे पेड़ की शाखाओं पर बैठा पक्षी, नीले आकाश में पंख फैलाकर उड़ता पक्षी आदि बहुत प्यारे लगते हैं। अब आप भी नीले आकाश में उड़ते हुए पक्षियों का चित्र बनाइए । जब चित्र तैयार हो जाए तो आप चित्र को पकड़कर एकल या सामूहिक नृत्य कर सकते हैं या अपने मनभावन गीत पर भाव नृत्य कर सकते हैं। आप सभी इन चित्रों को कक्षा या गलियारे में प्रदर्शित कर सकते हैं।
उत्तर :
विद्यार्थी निर्देशानुसार चित्र बनाएँगे और चित्र को पकड़कर नृत्य प्रस्तुत करेंगे।
अभिभावकों / शिक्षकों/मित्रों की सहायता से नीचे दिए गए गीत को खोजिए और समूह में गाइए।
सूरज एक, चंदा एक, तारे अनेक,
एक तितली, अनेक तितलियाँ,
एक गिलहरी, अनेक गिलहरियाँ,
एक चिड़िया, अनेक चिड़ियाँ
उत्तर :
विद्यार्थी इस गीत को अभिभावकों/शिक्षकों/मित्रों की सहायता से खोजकर एकल या समूह – गायन करेंगे तथा कक्षा या गलियारे में प्रदर्शित कर सकते हैं।
आनंदमयी गतिविधि
प्रश्न 1. नीचे दिए गए अक्षर जाल में पक्षियों के नाम खोजिए और उनके बारे में जानकारी एकत्रित कीजिए। (विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ – 13 पर दिए गए अक्षर जाल को देखें।)
प्रश्न 2. जब शिशु पक्षी चहचहाते हैं तो एक मधुर ध्वनि सुनाई देती है। आइए, हम भी शिशु पक्षियों की तरह चहचहाएँ।
सभी बच्चे अपनी एक हथेली अपने होठों पर रखें। सभी मिलकर ची-चीं की ध्वनि निकालें। आपको लगेगा कि आप ही पेड़ की शाखाओं से शिशु पक्षी बनकर यह ध्वनि निकाल रहे हैं। बस पक्षियों की चहचहाहट सुनिए और आनंद लीजिए ।
पक्षियों की ध्वनियों को निकालना और सुनना सभी को रुचिकर लगता है। आइए, अब हम बारी-बारी से किसी भी पक्षी की ध्वनि निकालें और तालियों की गड़गड़ाहट से उसका स्वागत करें।
उत्तर :
हमने शिशु पक्षियों की तरह चहचहाने की गतिविधि की। सभी बच्चों ने अपने हाथ होंठों पर रखकर “ची-चीं” की ध्वनि निकाली। ऐसा करते समय हमें बहुत मज़ा आया और लगा जैसे हम सच में पेड़ पर बैठे छोटे पक्षी हैं।
फिर हमने बारी-बारी से अलग-अलग पक्षियों की आवाज़ निकालो जैसे तोते की टें टें, कबूतर की गुटर-गूँ, कौए की काँव-काँव आदि ध्वनियाँ और सभी ने तालियाँ बजाकर एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाया। यह गतिविधि बहुत आनंददायक और रोचक लगी।
प्रश्न 3. नीचे पशु-पक्षियों से संबंधित कुछ पहेलियाँ दी गई हैं । पहेलियों का उपयुक्त चित्रों से मिलान कीजिए-
उत्तर :
बोलिए फटाफट
नीचे कुछ रोचक और चुनौतीपूर्ण पहेलियाँ दी गई हैं, शीघ्रता से उनका उत्तर दीजिए- ( विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ – 15 पर दी गई चुनौतीपूर्ण पहेलियों को पढ़ें।)
उत्तर :
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