Class 3 | Hindi | Veena | Ch. 10 रस्साकशी

Class 3 | Hindi | Veena | Ch. 10 रस्साकशी
Question Answer

रस्साकशी 

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न- अभ्यास (पृष्ठ 84-90)

बातचीत के लिए

प्रश्न 1. आप कौन-कौन से खेल खेलते हैं?
उत्तर- हम 
लुका-छिपी, फुटबॉल, साइकिल रेस, जूडो-कराटे, नदी-पहाड़, खो-खो, लुडो, कैरम, क्रिकेट, रस्सीकूद, साँप-सीढ़ी  इत्यादि खेल खेलते हैं।

प्रश्न 2. आपका सबसे प्रिय खेल कौन-सा है?
उत्तर-
 मेरा सबसे प्रिय खेल क्रिकेट है।

प्रश्न 3. ऐसे खेलों के नाम बताइए जिनमें दो टीमें आमने-सामने होती हैं?
उत्तर-
कबड्डी, खों-खो, बास्केट बॉल, फुटबॉल, हॉकी, बॉलीबॉल, क्रिकेट इत्यादि।

प्रश्न 4. आपने रस्सी का प्रयोग करते हुए कौन-कौन से खेल खेले हैं?
उत्तर-
 हमने रस्सी का प्रयोग करते हुए रस्सीकूद, रस्साकशी, ऊँची छलाँग, जोड़े रस्सी कूद आदि खेल खेले हैं।

प्रश्न 5. वे कौन-से खेल हैं जिन्हें खेलने के लिए हमें अधिक साथियों की आवश्यकता पड़ती है?
उत्तर-
क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, बॉलीवॉल, खो-खो, रग्बी, बॉस्केट बॉल, कबड्डी, इत्यादि खेल खेलने के लिए हमें अधिक साथियों की आवश्यकता पड़ती है।

सोचिए और लिखिए

प्रश्न 1.कविता में “जोर लगाओ, हेई सा! हेई सा! भई, हेई सा!” क्यों कहा गया है?

उत्तर- कविता में ‘रस्साकशी’ खेल का वर्णन है। इस खेल में बच्चों का उत्साहवर्धन करने और आत्म-विश्वास बढ़ाने के लिए उत्साहवर्धक शब्द ‘जोर लगाओ हेई सा!’ कहा जाता है। बच्चे इस वाक्य को सुनकर बच्चे जोश से भर उठते हैं और खूब जोर लगाते हैं। इसलिए कविता में “जोर लगाओ, हेई सा! हेई सा! भई, हेई सा” कहा गया है।

प्रश्न 2. कविता में शरीर से जुड़े किन-किन अंगों का वर्णन हुआ है? ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर-

  • सीना – तानकर
  • कमर – जकड़कर
  • पैर – गड़ाकर
  • पीठ – अड़ाकर
  • हाथ – रस्सी फिसले नहीं
  • माथा – पसीने से तर

प्रश्न 3. रस्साकशी के खेल में जीतने के लिए क्या-क्या करना पड़ता है?
उत्तर-
रस्साकशी के खेल में जीतने के लिए रस्सी को जोर से पकड़ना पड़ता है। सीना तानकर, अकड़कर खड़े रहना पड़ता है। थोड़ा-सा तिरछे होकर, कमर से जोर लगाना पड़ता है ताकि रस्सी तनकर अपनी तरफ आ जाए। यह ध्यान रखना पड़ता है कि रस्सी हाथ से न फिसले। साथी इधर-उधर न गिरे और दाँव-पेंच लगाकर पूरे जोश को बरकरार रखना पड़ता है। पसीने से तर-बतर होकर ही खेल में जीत संभव है।

प्रश्न 4. चित्र में दिखाया गया खेल रस्साकशी कैसे खेला जाता है, लिखिए-

उत्तर-

  1. दो समूह, दोनों ओर से एक रस्सी को मजबूती से पकड़ते हैं।
  2. दोनों समूहों की कोशिश होती है कि रस्सी पूरी ताकत से अपनी ओर खींच लें। इसके लिए वे जोर लगाते हैं।
  3. दोनों तरफ के बच्चे (सदस्य) सीना तानकर अकड़कर रस्सी पकड़कर खड़े होते हैं।
  4. कभी तिरछे खड़े होकर कभी कमर से जकड़कर रस्सी को अपनी ओर खींचने का प्रयास करते हैं।
  5. ध्यान रखते हैं कहीं हाथ से रस्सी न फिसल जाए। जोश में कोई कमी या कसर नहीं होनी चाहिए।
  6. सारे दाँव-पेंच लगाकर ज़ोर से रस्सी अपनी ओर खींचना होता है।
  7. रस्सी खींचते समय जोर लगाओ हेई सा ! कहे और अपनी ओर रस्सी खींचकर जीत जाते हैं।

प्रश्न 5. आपने बहुत से खेल खेले होंगे। आइए, चित्र देखकर खेल पहचानिए-


उत्तर-

  1. कबड्डी
  2. कित कित
  3. कोसंपा (पोसंपा)
  4. गिल्ली डंडा

भाषा की बात

प्रश्न 1. कविता में अकड़-पकड़ जैसे तुक मिलने वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। आप भी तुक मिलाने वाले शब्द सोचकर लिखिए-


उत्तर-

अकड़पकड़
अड़ाओलड़ाओ
बजाएँसजाएँ
पानीनानी
बस्तीमस्ती
बच्चासच्चा
कंधाअंधा
चमकेदमके
तरबूजाखरबूजा
बस्तासस्ता

प्रश्न 2.
आइए खेलें ‘मात्रा हटाओ, दूसरा शब्द बनाओ, जादू दिखाओ’ का खेल
NCERT Class 3 Hindi Veena Chapter 10 Question Answer रस्साकशी 6
इसी प्रकार नीचे दिए गए शब्दों की मात्रा हटाइए और उसके सामने नया शब्द लिखते हुए अपना जादू दिखाइए-


उत्तर-
(क) काम – कम
(ख) बीस – बस
(ग) मेला – मल
(घ) यही – यह

कविता से आगे

प्रश्न 1.
नीचे कुछ खेलों के नाम दिए गए हैं। इनमें से कुछ खेल घर से बाहर मैदान में खेले जाते हैं और कुछ घर के भीतर खेले जाते हैं। घर से बाहर तथा घर के भीतर खेले जाने वाले खेलों को छाँटते हुए उन्हें अलग-अलग लिखिए-


उत्तर-

घर के भीतर खेले जाने वाले खेलघर के बाहर खेले जाने वाले खेल
लूडोफुटबॉल
साँप-सीढ़ीहॉकी
शतरंजरस्साकशी
चिड़िया उड़क्रिकेट
कैरमबोर्डखो-खो
टेबल टेनिसगिट्टे

प्रश्न 2. आपका सबसे प्रिय खेल कौन-सा है? उसके बारे में चार पंक्तियाँ लिखिए-


उत्तर-

मेरा सबसे प्रिय खेल फुटबॉल है।

  1. फुटबॉल टीम में दो समूह होते हैं। प्रत्येक समूह में 11-11 खिलाड़ी होते हैं।
  2. यह खेल मैदान में खेला जाता है। मैदान में दोनों समूहों का 1-1 गोल पोस्ट होता है।
  3. खेल के दौरान मैदान में प्रतिपक्ष गोल पोस्ट (नेट का खाना) पर जाकर गेंद फेंकने का प्रयास करता है।
  4. प्रतिपक्ष (द्विपक्षी टीम के गोल पोस्ट में जितनी बार गेंद डाली जाए उतने अंक से टीम विजयी होती है।

प्रश्न 3. आओ बताएँ-

  1. मेरा नाम सलोनी है। तुम्हारा नाम क्या है ?
  2. मैं प्रतिदिन शाम को मित्रों के साथ खेलती हूँ। तुम कब और किसके साथ खेलते हो?
  3. मुझे छिपा – छिपी खेलना बहुत अच्छा लगता है और तुम्हें?
  4. खेलने से मैं शरीर में ऊर्जा और फुर्ती अनुभव करती हूँ।

उत्तर-

  1. मेरा नाम शुभांकर है।
  2. मैं प्रतिदिन शाम को अपने मित्र देवांश, आयुक्ष, अक्षत, रौशन, जॉन, आवेश और भी अन्य साथियों के साथ खेलता हूँ।
  3. मुझे क्रिकेट खेलना बहुत अच्छा लगता है। साथ ही सभी मित्रों को लेकर मैं फुटबॉल भी खेलता हूँ।
  4. खेलने से मेरा शरीर स्वस्थ और बलवान है। खेल खेलकर मैं प्रसन्न और अनुशासित रहती हूँ। इसके साथ ही हर समय सकारात्मकता का अनुभव होता है।

बनाइए

प्रश्न 1. खेल खेलते समय प्राय: छोटी-छोटी चोट लग जाती है। जब आपको चोट लगती है, तब आप क्या-क्या करते हैं? अपने लिए एक छोटा-सा डिब्बा बनाइए और बताइए कि आप उसमें रुई और पट्टी के अतिरिक्त क्या-क्या रखेंगे?


उत्तर- डेटॉल, स्प्रिट, बैन्डेड, आयोडेक्स, मूव, ग्लूकोज, बेटाडीन, ट्यूब (लोशन), दर्द निवारक गोली, थर्मामीटर, पट्टी टेप, कैंची आदि।

(नोट- ये सभी चीजें रखने से पहले अस्पताल के चिकित्सक को अवश्य दिखा लें। उनकी सलाह से ही दवाइयाँ खरीदें।)

कुछ नया करें

प्रश्न 1. नीचे कुछ खेलों के चित्र दिए गए हैं। आप इनमें से अपने मनभावन खेल को पहचानिए और उस खेल में रुचि होने का कारण भी लिखिए-


उत्तर-
कंचा खेल – मुझे कंचा खेलना बहुत पसंद है। रंग-बिरंगे कंचों को देखकर मन प्रफुल्लित हो उठता है। कंचा काँच की छोटी-छोटी गोलियों को कहते हैं। सुंदर चमकीला, रंगों से भरा काँच की गोलियाँ बाज़ार में खरीदा जा सकता है। अलग-अलग रंगों की गोलियों को निशाना लगाकर मारा जाता है। जिसके लिए हाथों की अंगुलियों का इस्तेमाल किया जाता है। जो साथी जितना सटीक निशाना लगाकर दूसरे साथी के कंचे को मारकर बाहर निकालेगा। वो कंचा उसका हो जाएगा। खुशी देने वाली बात ये होती है कि कंचों को जीतकर हासिल किया जाता है। अब इस खेल को आप भी खेलिए।

प्रश्न 2. चित्रों में अपनी रुचि के अनुसार रंग भरिए। किसी एक खेल के बारे में अपने विचार लिखिए-


उत्तर-
बैट बॉल- मुझे बैट बॉल खेलना बहुत पसंद है।

  1. बैट बॉल मैदान में खेला जाता है। यह खेल एक से ज्यादा मित्रों के साथ खेल सकते हैं।
  2. एक साथी बैट पकड़कर खड़ा होता है और दूसरा साथी एक निश्चित दूरी से गेंद फेंकता है।
  3. दौड़कर रन बनाना और गेंद क्रिकेट (डंडे) पर मारना ये दो मुख्य काम साथियों द्वारा किया जाता है।
  4. गेंद यदि उछलकर ऊपर की तरफ उठती है तो विपक्षी साथी दौड़कर उसे पकड़ने में लग जाते हैं।

भागम-भाग का यह खेल मन को प्रसन्न कर देता है।

Class 3 Hindi Chapter 10 रस्साकशी कविता का सार

‘रस्साकशी’ नामक कविता कन्हैया लाल ‘मत्त’ जी द्वारा लिखी गई है। इस खेल गीत में रस्साकशी खेल खेलने के लिए दो समूह एवं एक रस्सी की आवश्यकता होती है। रस्साकशी खेल प्रारंभ होता है। दोनों तरफ मित्रों का समूह इस रस्सी को जोर से पकड़कर खींचते हैं। कभी तिरछे, कभी आड़े तो कभी कमर पकड़कर जोर से अपनी ओर खींचा तानी करते हैं। जोश बढ़ाने के लिए बच्चे एक सुर में गाना भी गाते हैं- ‘जोर लगाओ हेई सा!’ सभी बच्चे पसीने से तर-बतर रस्सी खींचते हुए खेल का आनंद लेते हैं।

Class 3 Hindi Chapter 10 रस्साकशी काव्यांशों की व्याख्या (Summary of the Poem)

1. जोर लगाओ, हेई सा!
हेई सा! भई, हेई सा!
सीना ताने रहो अकड़ कर,
रस्सा दोनों ओर पकड़ कर,
तिरछे पड़ कर, कमर जकड़ कर,
जोर लगाओ, हेई सा!
हेई सा! भई, हेई सा! (पृष्ठ 82)

शब्दार्थ : सीना – छाती। रस्सा – रस्सी।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वीणा भाग-1’ में संकलित कविता ‘रस्साकशी’ से ली गई है। इसके कवि कन्हैया लाल ‘मत्त’ जी हैं। इसमें रस्साकशी खेल कैसे खेला जाता है उसके बारे में विस्तृत वर्णन किया गया है। इस खेल को खेलकर बच्चे कैसे आनंदित होते हैं, यह संकेत दिया गया है।

व्याख्या – कवि कहते हैं कि दोनों ओर से रस्सी पकड़कर जोर लगाओ ! जोर लगाओ! जोर लगाकर हेई सा ! कहो। रस्सी के एक छोर को पकड़कर सीना ताने अकड़े रहो। दूसरी ओर से भी रस्सी पकड़ो। ज़ोर से पकड़े रहो। कभी तिरछे होकर जोर से खींचो कभी कमर से जकड़कर जोर से खींचो। जैसे भी हो रस्सी अपनी ओर खींचो। जोर से हेई सा! कहकर रस्सी खींचो।

2. खींचो खींचो, जोर लगाओ,
पैर गड़ा कर, पीठ अड़ाओ,
आड़ी-तिरछी चाल भिड़ाओ,
जोर लगाओ, हेई सा!
हेई सा! भई, हेई सा! (पृष्ठ 82)

शब्दार्थ : चाल-चलना।

प्रसंग – पूर्ववत्।

व्याख्या – कवि कहते हैं खींच-खींचकर जोर लगाओ। रस्सी को अपनी ओर खींचने के लिए जमीन में पैर गड़ाकर पीठ को सामने से अड़ाकर जोर लगाओ। कभी आड़े से रस्सी खींचो तो कभी तिरछे होकर अपने पैर जगाओ। जैसे भी हो जोर लगाओ और जोर लगाओ।

3. रस्सा नहीं फिसलने पाए,
साथी नहीं बिचलने पाए,
जोश-खरोश न ढलने पाए,
जोर लगाओ, हेई सा!
हेई सा! भई, हेई सा! (पृष्ठ 83)

शब्दार्थ : रस्सा – रस्सी।

प्रसंग – पूर्ववत्।

व्याख्या – कवि कहते हैं कि जोर से रस्सी पकड़ो। रस्सी खींचते समय इतने जोर से पकड़ो कि रस्सी हाथों से फिसलने न पाए। कोई भी साथी यहाँ वहाँ न बिखर जाए। रस्सी ऐसे पकड़ो कि साथियों का जोश बरकरार रहे। पूरे जोश के साथ रस्सी खींचो। प्रत्येक साथी बिना विचलित हुए इस रस्सी को जोर से खींचो।

4. हुए पसीने से तर सारे,
सफल हुए सब दाँव करारे,
इधर हमारे, उधर तुम्हारे,
जोर लगाओ, हेई सा!
हेई सा! भई, हेई सा! (पृष्ठ 82)

शब्दार्थ : दाँव – युक्ति। करारे – कड़ा, तेज/खूब खींचा हुआ।

प्रसंग – पूर्ववत्।

व्याख्या – कवि कहते हैं कि रस्सी खींचने वाले इस खेल में सभी पसीने से तर-बतर हो गए हैं। जीतने के सभी तरीकों से खेल में सफलता मिली है। जिस समूह में जो-जो थे वे सभी उधर ही रह गए। एक तरफ हमारे साथी और दूसरी तरफ तुम्हारे साथी। फिर भी जोर लगाए जाओ। खूब जोर लगाओ।

  • ‘रस्साकशी’ कविता में विद्यार्थी रस्साकशी खेल के बारे में जानेंगे।
  • यह समझेंगे कि कोई विशेष कार्य करने पर हमारे मुख से अपने-आप कुछ ध्वनियाँ/आवाजें निकलती हैं जो हममें जोश पैदा करती हैं।
  • सहयोग की भावना से परिचित होंगे।
  • कविता लेखन के लिए तुकांत (लय) वाले शब्दों को सीखेंगे।

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